कश्मीरियों को अलग वीजा मंजूर नहीं: भारत
८ अप्रैल २०१०भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के साथ चीन के दौरे पर गई विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, "हम जम्मू कश्मीर के लोगों को पासपोर्ट के साथ अलग से नत्थी कागज पर वीजा देने को स्वीकार नहीं करते हैं.
बातचीत के दौरान हमने अपनी यह बात एक बार फिर साफ कर दी है." भारत कहता है कि जम्मू कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इस राज्य में रहने वाले लोगों और बाकी देश के लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए.
चीनी नेताओं के साथ कृष्णा की बैठक के बाद राव ने पत्रकारों से कहा, "चीनी पक्ष ने ध्यान से हमारी बातें सुनीं. हमने इस बात पर जोर दिया कि भारत की चिंताओं पर और अधिक संवेदनशीलता से ध्यान दिया जाए. यह चीन के साथ जारी वार्ता की प्रक्रिया का विषय है."
राव ने कहा कि कृष्णा ने चीनी विदेश मंत्री यांग चिएची के साथ मुलाकात में जम्मू कश्मीर के लोगों को अलग से कागज पर वीजा देने के मुद्दे पर भारत की चिंताओं को उठाया.
दोनों देशों ने एक हॉटलाइन स्थापित करने का समझौता भी किया है जिसके जरिए भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री वेन चियापाओ सीधे बात कर सकेंगे.
हॉटलाइन स्थापित करने का फैसला पिछले साल रूस के येकातरिनबुर्ग शहर में मनमोहन सिंह और चीनी राष्ट्रपति हू चिनथाओं की मुलाकात के दौरान किया गया. कृष्णा ने कहा कि हॉट लाइन कायम होने से पता चलता है कि दोनों देश एक दूसरे के करीब आ रहे हैं.
चार दिन के चीन दौरे में कृष्णा ने चीनी प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को चीनी समर्थन का मुद्दा भी उठाया.
भारत ने चीन से कहा है कि वह संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के प्रति अपनी नीति पर दोबारा विचार करे और विश्व संस्था के इस कोर ग्रुप में अपने पड़ोसी भारत के प्रवेश का स्वागत करे. भारत के मुताबिक इससे कई मुद्दों पर दोनों देशों के हित जुड़े हैं. इनमें जलवायु परिवर्तन और विश्व व्यापार जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं.
चीनी नेताओं से मुलाकातों में कृष्णा ने पाकिस्तानी कश्मीर में चीनी कंपनियों की निर्माण गतिविधियों पर भारत की चिंताओं को भी उठाया. राव ने कहा, "बिल्कुल यह मुद्दा भी उठा. हमने अपनी चिंताएं उन तक पहुंचा दी हैं."
रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार
संपादनः एस गौड़