अमेरिकी युद्धपोत लीबिया के पास पहुंचे
१ मार्च २०११लीबिया पर अब तक का सबसे कड़ा प्रहार करते हुए संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की दूत सूजन राइस ने कहा कि गद्दाफी सच्चाई से दूर जा रहे हैं और उन्हें लोगों का नेतृत्व करने का अधिकार नहीं रहा है.
अमेरिका ने गद्दाफी के करीबी लोगों से भी अपील की कि वे लीबियाई नेता का साथ छोड़ दें. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्ने ने कहा, "आपको यह बात बहुत गंभीरता से समझनी चाहिए कि आप किस तरफ हैं. आपकी जिम्मेदारी बनती है."
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुरू में लीबिया के खिलाफ बहुत संभल कर बयान दिए, जिसकी वजह से रिपब्लिकन पार्टी ने उन पर आरोप भी लगाए. इसके बाद अमेरिका ने सैनिक तैयारी की है. हालांकि अमेरिका का कहना है कि वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता था, जिससे लीबिया में रह रहे अमेरिकियों की जान को खतरा हो. जैसे ही अमेरिकी नागरिकों से भरा विमान लीबिया से लौटा, ओबामा प्रशासन ने शुक्रवार को लीबिया के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिया.
लीबिया के नेता मोअम्मर गद्दाफी के प्रति अब अमेरिका की नीति साफ हो गई है. लेकिन वहां कई विद्रोही गुटों से उसे कैसे निपटना है, अभी यह साफ नहीं हो पाया है. अमेरिकी अधिकारी उनके संपर्क में हैं लेकिन फौरी तौर पर उन्हें सैनिक सहायता देने की बात सामने नहीं आई है. लीबिया में कर्नल गद्दाफी के खिलाफ लोग खड़े तो हुए हैं लेकिन उनका कोई नेतृत्व सामने नहीं आ पाया है.
वित्तीय दबाव
अमेरिका ने गद्दाफी के गद्दी छोड़ने के लिए लीबिया पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है. अमेरिका ने 30 अरब रकम पर पाबंदी लगा दी है. कर्नल गद्दाफी और उनके रिश्तेदार इस रकम को नहीं हासिल कर पाएंगे.
उधर, अमेरिकी पत्रकार क्रिस्टियान अमानपोर को दिए एक इंटरव्यू में कर्नल गद्दाफी से पूछा गया कि क्या वे सत्ता छोड़ रहे हैं, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि लीबिया के लोग अभी भी उनसे प्यार करते हैं.
इस बारे में जब अमेरिकी दूत राइस से पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "यह साफ लगता है कि वह भ्रम में जी रहे हैं. वह अपने ही लोगों का गला काट रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय पत्रकार के सामने हंस रहे हैं. यह साबित करता है कि वह सच्चाई से कितने दूर हो चुके हैं."
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गद्दाफी पर सत्ता छोड़ देने का दबाव बढ़ गया है. रिपोर्टें हैं कि अब तक की हिंसा में 1,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई हजार लोग घर बार छोड़ कर लीबिया से चले गए हैं.
अमेरिकी फौजी तैयारी
अमेरिका का कहना है कि उसके युद्धक जहाज लीबिया के पास पहुंच रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर उनका इस्तेमाल हो सके. अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का कहना है कि इन जहाजों का प्रयोग राहत और बचाव कार्य में किया जा सकता है. अमेरिका ने नहीं बताया कि उसके सैनिक बेड़े कहां तैनात हैं लेकिन रिपोर्टें हैं कि यह इटली के आस पास हैं. अमेरिका कोशिश कर रहा है कि लीबिया के आसमान में नो फ्लाई जोन स्थापित किया जाए, जिससे कर्नल गद्दाफी बेनगाजी में विद्रोहियों पर हवाई हमला न कर सकें.
रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल
संपादनः वी कुमार